खतौनी किसे कहते हैं|| खतौनी का अर्थ-Khatoni kise kehte hain in hindi

 खतौनी से आप क्या समझते हैं 

खतौनी:- यद्यपि खतौनी शब्द भू राजस्व अधिनियम में कहीं भी वर्णित नहीं है फिर भी अधिनियम में वर्णित वार्षिक रजिस्टर नामक जो कागजात धारा 33 में वर्णित है वही खतौनी के नाम से पुकारा जाता है|खतौनी अब 6 साल में एक बार तैयार की जाती है जो शासनादेश संख्या 3971-4026/4-64-78 तारीख 9 मार्च 1979; 1387 फसली से प्रभावी है|

स्मरणीय है कि खतौनी में केवल 13 खाने होते हैं जोतदार का नाम, पिता का नाम और निवास-स्थान कब्जा-धारण की अवधि मालगुजारी आदि विवरण खतौनी मैं विशेषतया होते हैं जो किसी अन्य कागजात में नहीं होते|

              खतौनी में जोतदारों का वर्णन होता है कि वह किस हैसियत से भूमि को धारण कर रहे होते हैं यदि किसी व्यक्ति ने अपनी भूमि में मकान आदि बना लिया है तब भी वह इस में दर्ज रहेगा जब कभी भूमि के कब्जे में परिवर्तित हो तो इस रजिस्टर में दाखिल खारिज प्रक्रिया के कब्जे का इंदराज (Enter) किया जाता है|

षटवर्षीय खतौनी पूर्व खतौनी के सहायता से निम्न- लिखित प्रारूप में बनाई जाएगी|

1. खाता नंबर 

2. जोतदार का नाम; पिता का नाम और निवास स्थान 

3. जोतदारी प्रारंभ होने का वर्ष 

4. खाता के प्रत्येक गाटा (प्लॉट) का खसरा नंबर 

5. खाता के प्रत्येक गाटे का क्षेत्रफल 

6. जोतदार द्वारा देय मालगुजारी या लगान 

7. फसली 

8. फसली 

9. फसली 

10. फसली 

11. फसली

12. फसली 

13. कैफियत (रिमार्क)

      (परिवर्तन का आदेश देने वाले अधिकारी का पद आदेश का सारांश या आदेश संख्या और दिनांक सहित निर्विवादित के मामले में वह आदेश या सुपरवाइजर कानूनगो द्वारा प्रमाणित हो)

लेखपाल किसी सक्षम अधिकारी द्वारा खतौनी में परिवर्तन करके दिए गए आदेश को सम्मिलित करते हुए पुरानी खतौनी से नए खतौनी तैयार करेगा ऐसे परिवर्तन नहीं खतौनी में लाल सही से लिखे जाएंगे और इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष में जो परिवर्तन हो उसे प्रथम वर्ष में खाना 7 में दर्ज किया जाए द्वितीय वर्ष के परिवर्तन को खाना 8 में दर्ज किया जाए तृतीय वर्ष में जो परिवर्तन के आदेश हो खाना 9 में दर्ज किया जाए चौथे वर्ष में परिवर्तन को खाना 10 में, 5 वर्ष के परिवर्तन को खाना 11 में और छठे वर्ष के परिवर्तन को खाना 12 में दर्ज किया जाए| किसी षट्वर्षीय खतौनी के प्रारंभ से छ: वर्ष का खाना 1 से 6 तक में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता हैै|

         उत्तर प्रदेश जमीदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 143 के अंतर्गत किसी भूमिधर की ज्योति या उसके भाग को परगना अधिकारी द्वारा कृषि भूमि घोषित किया गया है तो उसे उस घोषणा को खाना सात आठ नौ दस ग्यारह या 12 में घोषणा करने के वर्ष के अनुसार लिख दिया जाएगा और ऐसी प्रविष्टि प्रत्येक वर्ष में लिखी जाती रहेगी यदि किसी समय पर वह प्रविष्टि अधिनियम की धारा 144 के अंतर्गत निरस्त कर दी जाए तो निरस्त आदेश का विवरण भी उस वर्ष में लिखा जाएगा और इसके पश्चात आने वाले वर्ष में खतौनी में उस पर अवस्थी को न लिख जाएगा

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