यू पी राजस्व संहिता 2006 की धारा 74
धारा 74 के अंतर्गत खातेदारी के वर्ग के संबंध में आप क्या समझते हैं
खातेदारी का वर्ग :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 74 के अनुसार निम्नलिखित वर्ग के खातेदार होंगे अर्थात-
1. संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
2. संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर
3. आसामी
4. सरकारी पट्टेदार|
1. संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 75 के अनुसार निम्नलिखित वर्गों में से किसी वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर कहा जाएगा और उसको वैसा अधिकार प्राप्त होंगे और वे उन सब दायित्व के अधीन होगा जो इस संहिता के द्वारा या अधीन वैसे भूमिधरों को प्रदर्शित किए गए हो या उन पर आरोपित किए गए हो अर्थात-
(क) प्रत्येक व्यक्ति जो संहिता के प्रारंभ के दिनांक के ठीक पूर्व संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर था
(ख) प्रत्येक व्यक्ति जो संहिता के उपबंधों के अधीन या अनुसार या तत्सम में लागू किसी अन्य विधि के अधीन किसी अन्य रीति से उक्त दिनांक को या उसके पश्चात ऐसे भूमिधर का अधिकार प्राप्त कर लें|
2. असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 76 के अनुसार एक निम्नलिखित वर्गों में से किसी वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर कहा जाएगा और उसको वह सब अधिकार प्राप्त होंगे और वह उन सब दायित्व के अधीन होगा जो इस संहिता के द्वारा यहां दिन ऐसे भूमिधरों को प्रदान किए गए हो या उन पर आरोपित किए गए हो अर्थात-
(क) प्रत्येक व्यक्ति जो इस संहिता के आरंभ के दिनांक के ठीक पूर्व असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर था
(ख) प्रत्येक व्यक्ति जिसे भूमि प्रबंधक समिति द्वारा उक्त दिनांक को या उसके पश्चात इस संहिता के उपबंधों के अधीन या अनुसार किसी पर असंक्रमणीय अधिकार वाले भूमिधर के रूप में स्वीकार किया गया हो
(ग) प्रत्येक व्यक्ति जिसे उक्त दिनांक को या उसके पश्चात उत्तर प्रदेश भूदान यज्ञ अधिनियम 1952 के उपबंधों के अधीन कोई भूमि आवंटित हो
(घ) प्रत्येक व्यक्ति से दिनांक को या उसके पश्चात उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम 1960 के उपबंधों के अधीन कोई भूमि आवंटित हो
(घ घ) प्रत्येक व्यक्ति जो इस संहिता के लागू होने के दिनांक से ठीक पहले धारा 77 के अंतर्गत न आने वाली भूमि का कब्जेदार आसामी था और 1407 फसली के वार्षिक रजिस्टर (खतौनी) की श्रेणी-3 में इस रूप में दर्ज था
परंतु यह कि जहां किसी व्यक्ति को की कब्जे की भूमि और उसके द्वारा उत्तर प्रदेश में धारित कोई अन्य भूमि जो उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम 1960 के अधीन आधारित अधिकतम क्षेत्र से अधिक हो वहां ऐसे व्यक्ति के पक्ष में प्रथम उल्लिखित भूमि के उतने क्षेत्र के संबंध में जो उसके द्वारा धारित ऐसी भूमि को मिलाकर उस पर लागू अधिकतम क्षेत्र से अधिक ना हो संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधरी अधिकार प्रोद्भूत होगा और उक्त क्षेत्रों प्रयुक्त अधिनियम में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार वितरित इसे सीमांकन किया जाएगा|
(ड) प्रत्येक व्यक्ति जो इस संहिता के उपबंधों के अधीन या अनुसार उस समय लागू करने के लिए के अधीन किसी अन्य रीति से उक्त दिनांक को या उसके पश्चात ऐसे भूमिधर का अधिकार प्राप्त कर लें|
(2) प्रत्येक व्यक्ति जय संहिता के प्रारंभ के ठीक पूर्व असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर हो (5 वर्ष) से अधिक अवधि के लिए ऐसा भूमिधर रहा हो ऐसे प्रारंभ पर असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर हो जाएगा
(3) प्रत्येक व्यक्ति जो उपधारा (1) और (2) में निर्दिष्ट पर असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर हो या ऐसे प्रारंभ के पश्चात असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमि- धर हो जाता है असंक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर होने से 5 वर्ष की अवधि की समाप्ति पर संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर हो जाएगा
(4) इस संहिता के किसी अन्य उपबंध मैं दी गई किसी बात के होते हुए भी यदि कोई व्यक्ति उपधारा (2) या धारा (3) के अधीन संक्रमणीय अधिकार वाला भूमिधर हो जाने के पश्चात बिक्री द्वारा भूमि का अंतरण करता है तो वह ग्राम पंचायत या राज्य सरकार में निहित किसी भूमि के या उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम 1960 में यथापरिभाषित अतिरिक्त भूमि के पट्टे के लिए पात्र नहीं रह जाएगा|
कुछ भूमि पर भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं होंगे :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 77 एक के अनुसार एक इस संहिता या तत्सम लागू किसी अन्य विधि मैं किसी बात के होते हुए भी कोई व्यक्ति निम्नलिखित भूमि में भूमिधर के अधिकार अर्जित नहीं करेगा-
(क) खलिहान,खाद के गड्ढों, चरागाह या सामान्यतः कब्रिस्तान या शमशान के लिए प्रयुक्त भूमि;
(ख) भूमि में जिस पर पानी हो और जिसका उपयोग सिंघाड़ा या अन्य उपज उगाने के लिए किया जाता हो
(ग) भूमि जो नदी के तल में स्थित हो और जिसका उपयोग आकस्मिक या किया यदा-कदा खेती के लिए किया जाता है
(घ) स्थान परवर्ती या अस्थाई खेती के ऐसे भूभाग जिन्हें राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें
(ड) भूमि जिसे राज्य सरकार ने टोंगिया बागान के लिए आशियत घोषित या प्रथक रक्षित किया हो और ऐसा अधिसूचित किया हो
(च) बाग भूमि जो धारा 59 के अधीन किसी ग्राम पंचायत या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी को सौंपी गई हो या सौंपी गई समझी गई हो
(छ) सलेज फार्म या मलगत भूमि में सम्मिलित भूमि जो धारा 59 के अधीन किसी ग्राम पंचायत या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी को सौंपी गई हो या सौंपी समझी गई हो
(ज) भूमि जो सार्वजनिक प्रयोजन या लोकोपयोगी कार्य के लिए अर्जित या धृत हो
(झ) भूमि जिस पर पोखर तालाब झील हो या जो तटबंध बांध गया भीटा का भाग हो
कोई अन्य भूमि जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस निमित्त विनिर्दिष्ट करें
स्पष्टीकरण :- (1) खंड (ज) में पद "सार्वजनिक प्रयोजन" में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे-
1. भूमि जो सैन्य शिविर भूमि के लिए पृथक रक्षित हो
2. भूमि जो रेलवे या नहर की सीमा में सम्मिलित हो
3. भूमि जो किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा स्वयं अपने प्रयोजनों के लिए अर्जित और धृत हो
4. भूमि जो उत्तर प्रदेश जोत चकबंदी अधिनियम 1953 की धारा 29 (ग) में निर्दिष्ट हो
5. भूमि जो किसी ग्राम पंचायत द्वारा सार्वजनिक उपयोग के प्रयोजनों के लिए आरक्षित है
6. विलुप्त भूमि
(2) इस संहिता के उपबंधों में किसी बात के होते हुए भी जहां इस धारा की उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कोई भूमि अथवा उसका कोई भाग लोक प्रयोजन के लिए क्रय अर्जित या पुनर्ग्रहित किए गए भूखंड या भूखंडों से घिरी है अथवा उसके उनके बीच में वहां राज्य सरकार ऐसे लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी को परिवर्तित कर सकेगी और यदि ऐसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी परिवर्तित की जाती है तो उपरोक्त लोक उपयोगिता की भूमि के बराबर या उससे अधिक भूमि उसी प्रयोजन के लिए उसी ग्रामपंचायत अथवा अन्य स्थानीय प्राधिकरण जैसे भी स्थिति हो मैं सुरक्षित कर दी जाएगी या राज्य सरकार इस संहिता की धारा 101 के अंतर्गत उसे विनिमय की अनुज्ञा वितरित इसे दे सकेगी
परंतु यह कि किसी लोक उपयोगिता की भूमि की श्रेणी अपवाद आत्मक प्रकरणों में ही ऐसे निबंधन एवं शर्तों पर परिवर्तित की जा सके कि जो कि वित्त की जाए लोक उप-योगिता में भूमि की श्रेणी परिवर्तित करने का कारण अभि-लिखित किया जाएगा
(3) राज्य सरकार भूमि की श्रेणी परिवर्तित करते समय या संहिता की धारा 101 के अंतर्गत उसके विनिमय की अनुज्ञा देते समय आरक्षित किए जाने के लिए या विनिमय किए जाने के लिए प्रस्तावित भूमि की स्थिति लोक उपयोगिता और उपयुक्ता पर विचार करेगी|
(4) यदि इस धारा की उपधारा (2) के अंतर्गत भूमि की श्रेणी परिवर्तित की जाती है तो कलेक्टर अधिकार अभिलेख (खतौनी) में और मानचित्र में तद्नुसार संशोधन का आदेश देगा|
स्पष्टीकरण :- इस धारा की उपधारा (2) में पद 'लोक प्रयोजन' का तात्पर्य आवश्यक परिवर्तनों के साथ भूमि अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रति- कर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 (अधिनियम संख्या 30 सन 2013) की धारा 3 के खंड (यक) का के अंतर्गत परिभाषित लोक प्रयोजन से है|
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