जंगम संपत्ति की कुर्की और बिक्री कैसे होती है ?-हिंदी
जंगम (चल)संपत्ति की कुर्की और बिक्री कैसे होती है ? (Attachment & Sale of Movable Property how made ?)
जंगम संपत्ति की कुर्की और बिक्री (Attachment & Sale of Movable Property) :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 की धारा 172 के अनुसार, (1) उप-जिलाधिकारी व्यतिक्रमी की जंगम (चल) संपत्ति की, जिसमें कृषि उपज भी सम्मिलित है कुर्की और बिक्री कर सकता है|
(2) निम्नलिखित संपत्ति उपधारा (1) के अधीन कुर्की और उपधारा (5) के अधीन बिक्री से मुक्त होगी :-
(क) व्यतिक्रमी उसकी पत्नी और उसके बच्चों के आवश्यक परिधान रसोई के बर्तन पलंग और बिस्तर और ऐसे व्यक्तिगत आभूषण जिनका धार्मिक प्रथा के अनुसार किसी महिला द्वारा त्याग नहीं किया जा सकता
(ख) ग्रामीण शिल्पी के औजार और यदि व्यतिक्रमी कृषक हो, तो उसके खेती के उपकरण (यांत्रिक शक्ति द्वारा चालित उपकरण को छोड़कर) और ऐसे पशु और बीज जो कुर्की अधिकारी की राय में उसी रूप में उसके जीविकोपार्जन कर सकने के लिए आवश्यक हों
(ग) धार्मिक उपासना के उपयोग के लिए अन्य रूप से अलग रखी गई वस्तुएं
स्पष्टीकरण 1-इस उपधारा के प्रयोजनार्थ पद 'कृषक' का तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से जो स्वयं भूमि पर खेती करता है और जो अपनी जीविका के लिए मुख्यतया कृषि भूमि से होने वाली आय पर निर्भर रहता है
स्पष्टीकरण 2- स्पष्टीकरण 1 के प्रयोजनार्थ किसी व्यक्ति के संबंध में यह समझा जायेगा कि वह स्वयं भूमि पर खेती करता है यदि वह :-
(क) स्वयं अपने श्रम से
(ख) अपने कुटुंब के किसी सदस्य के श्रम से, या
(ग) नकद या वस्तु रूप में या दोनों प्रकार से देय मजदूरी पर सेवकों या श्रमिकों द्वारा भूमि पर खेती करता है
(3) जहां कोई जंगम (चल) संपत्ति वास्तविक अभिग्रहण द्वारा कुर्क की जाए और व्यतिक्रमी कुर्क अधि- कारी को ऐसी प्रतिभूति दे जिसमें उसका समाधान हो जाए वहां इस प्रकार कुर्क की गई संपत्ति व्यतिक्रमी की अभिरक्षा में छोड़ दी जाएगी|यदि कुर्की के समय व्यतिक्रमी उपलब्ध न हो या यदि वे उपलब्ध हो किंतु कुर्क अधिकारी को ऐसी प्रतिभूति देने में विफल हो जिससे उसका समाधान हो जाए तो कुर्क की गई संपत्ति किसी ऐसे उत्तरदायी व्यक्ति के अभिरक्षा में छोड़ी जा सकती है जो उसकी अभिरक्षा का भाग लेने के इच्छुक हो
परंतु पशुधन की स्थिति में उसे निकटतम कांजी हाउस में ले जाया जा सकता है यदि न तो व्यतिक्रमी ऐसी प्रतिभूति देता है और न कोई उत्तरदायी व्यक्ति उसकी अभिरक्षा का भार लेने का इच्छुक हो
(4) ऐसा व्यक्ति जो उपधारा (3) के अधीन जंगम(चल) संपत्ति के अभिरक्षा का भार लेता है विहित प्रपत्र में एक बंध-पत्र (सुपुर्दनामा) (जो स्टांप शुल्क से मुक्त होगा) निष्पादित करेगा और ऐसी संपत्ति का परिरक्षण और अनुरक्षण करेगा और जहां कहीं अपेक्षित हो उसे प्रस्तुत करेगा सुपुर्ददार उसकी अभिरक्षा में दी गई संपत्ति की समस्त क्षति या हानि या आवश्यकता पड़ने पर उसे प्रस्तुत करने में विफलता के लिए दायी होगा|ऐसी क्षतियो या हानि का अवधारण उप-जिलाधिकारी द्वारा किया जाएगा और वे सुपुर्ददार से भू राजस्व के बकाए के रूप में वसूल किए जा सकेंगे
(5) यदि इस धारा के अधीन स्थावर संपत्ति की कुर्की के दिनांक से 30 दिनों की अवधि के भीतर बकाए की धनराशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो उपजिलाधिकारी विहित रीति से उसका विक्रय कर सकता है
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