बोर्ड की अधिकारिता शक्ति और निर्णय-Jurisdiction Powers and Decisions of the Board
परिषद और राजस्व अधिकारी के अधिकार कर्तव्य क्षेत्राधिकार और निर्णय को समझाइए
(Explain the Jurisdiction, Power & Decision of the Board)
राजस्व परिषद(Board of Revenue) :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 की धारा 7 के अनुसार (1) उत्तर प्रदेश के लिए राजस्व परिषद होगा जिसमें एक अध्यक्ष और ऐसे अन्य सदस्य होंगे जिन्हें राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर नियुक्त किया जाए :
परंतु इस संहिता के प्रारंभ होने के पूर्व गठित और कार्य कर रही परिषद को इस धारा के अधीन गठित परिषद समझा जाएगा
(2) उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्या 4 सन 2016 द्वारा विलोपित
(3) कोई भी व्यक्ति
(क) परिषद के प्रशासनिक सदस्य के रूप में नियुक्त के लिए पात्र नहीं होगा जब तक कि उसने आयुक्त के पद से अन्यून श्रेणी का पद धारण ना किया हो
(ख) परिषद के न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा जब तक कि उसने कलेक्टर के पद से अन्यून श्रेणी का पद धारण न किया हो
(4) राज्य सरकार नियुक्ति करते समय या उसके पश्चात किसी समय किसी भी सदस्य को परिषद के न्यायिक सदस्य के रूप में पदाभिहीत कर सकती है और किसी ऐसे सदस्य को केवल न्यायिक कार्य आवंटित किया जाएगा
परिषद की अधिकारिता (Jurisdiction of the Board) :- उक्त नई संहिता की धारा 8 के अनुसार (1) परिषद निम्नलिखित मामलों में मुख्य नियंत्रण प्राधिकारी होगा
(क) वादों अपीलो या पुनरीक्षण के निस्तारण से संबंधित सभी मामलों में और
(ख) राज्य सरकार के अधीक्षण निवेश और नियंत्रण के अधीन रहते हुए इस संहिता में दिए गए सभी अन्य मामलों में
(2) उपधारा (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए परिषद इस संहिता या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग कृत्यों का निष्पादन और कर्तव्य का निर्वहन करेगी
(3) राज्य सरकार परिषद के किसी सदस्य को या तो सामान्यत है या किसी विशेष क्षेत्र या विषय के संबंध में परिषद को प्रदत्त या उस पर आदेशों पर सभी या किसी शक्ति का प्रयोग कृत्य का निर्वाहन और कर्तव्य का पालन करने के लिए प्राधिकृत कर सकती है
कार्य का वितरण करने की शक्ति :- उक्त नई संहिता की धारा 9 के अनुसार (1) ऐसे नियमों या आदेशों के अधीन रहते हुए जिन्हें राज्य सरकार द्वारा बनाया जाए या जारी किया जाए परिषद अपने सदस्यों के बीच अपने कार्य का वितरण जैसा परिषद उचित समझे कर सकती है अध्यक्ष किसी विशिष्ट मामले या मामलों के वर्ग के निस्तारण के लिए एक से अधिक सदस्यों वाली पीठ या पीठों गठन कर सकता है
(2) ऐसे वितरण के अनुसार राजस्व परिषद के किसी सदस्य द्वारा दिए गए सभी आदेश या डिक्री यथास्थिति राजस्व परिषद के आदेश या डिक्री समझे जाएंगे
परिषद के विनिश्चय :- उक्त नई संहिता की धारा 10 के अनुसार (1) जहां अपील करने पर यह पुनरीक्षण के तौर पर परिषद के विचाराधीन आने वाले किसी कार्यवाही की सुनवाई 2 या उससे अधिक सदस्यों से बनी पीठ द्वारा की जानी हो वहां मामले का विनिश्चय ऐसे सदस्यों की राय या ऐसे सदस्यों के बहुमत यदि कोई हो से किया जाएगा
(2) जहां पीठ का गठन करने वाले परिषद के सदस्य किसी मामले के विनिश्चय के संबंध में अपनी राय में बराबर - बराबर विभाजित हो वहां उसकी सुनवाई अध्यक्ष द्वारा गठित की जाने वाली है वृहत्तर पीठ द्वारा की जाएगी और मामले का विनिश्चय से पीठ का गठित करने वाले सदस्यों की राय या ऐसे सदस्यों के बहुमत यदि कोई हो से किया जाएगा
(3) एकल रूप से आसीन किसी सदस्य द्वारा या 2 सदस्यों वाली किस खंडपीठ द्वारा या पूर्वक रूप से गठित किसी वृहत्तर पीठ द्वारा दिए गए सभी विनिश्चय परिषद के विनिश्चय समझे जाएंगे
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