अचल संपत्ति की कुर्की और विक्रय
स्थावर (अचल) संपत्ति की कुर्की और विक्रय की प्रक्रिया बताइए|(Explain the procedure of Attachment & Sale of Immovable Property)
स्थावर (अचल) संपत्ति की कुर्की (Attachment of Immovable Property) :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 की धारा 182 के अनुसार, (1) धारा 174 या धारा 177 के अधीन किसी स्थावर संपत्ति अचल संपत्ति की कुर्की आधार 175 के दिन किसी भूमि को पट्टे पर देने की प्रत्येक आदेशिका का कलेक्टर द्वारा जारी की जाएगी
कुर्की के विरुद्ध आपत्ति (Objection against attachment) :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 की धारा 183 के अनुसार, (1) जहां कोई दावा, इस अध्याय के अधीन कुर्क की गई किसी भूमि के संबंध में व्यतिक्रमी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा उसके अधीन दावा कर रहे किसी व्यक्ति द्वारा किया गया है तो कलेक्टर जांच के पश्चात ऐसे दावा को समुचित सूचना के पश्चात स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है:-
परंतु ऐसे किसी दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा:-
(क) जहां दावा किए जाने के पूर्व कुर्क की गई संपत्ति का पहले ही विक्रय किया जा चुका हो या
(ख) जहां कलेक्टर का यह विचारों के दावे को सोच समझकर या अनावश्यक रूप से निलंबित किया गया है या
(ग) जा कुर्की के दिनांक से 30 दिनों के पश्चात दावा प्रस्तुत किया गया है
(2) वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन आदेश किया गया हो आदेश के दिनांक से 60 दिनों के भीतर ऐसे अधिकार जिसका वह कुर्क की गई संपत्ति के लिए दावा करता है कोई स्थापित करने के लिए आयुक्त के यहां अपील प्रस्तुत कर सकता है किंतु ऐसी अपील यदि कोई हो के परिणाम के अध्ययन कलेक्टर का आदेश अंतिम होगा
विक्रय की उद्घोषणा (Proclamation of Sale):- उक्त नई संहिता की धारा 184 के अनुसार, (1) जहां इस अध्याय के उपबंधों के अधीन किसी स्थावर (अचल) संपत्ति का विक्रय किया जाना वांछित हो वहां कलेक्टर या उसके द्वारा प्राधिकृत कोई सहायक कलेक्टर विहित प्रपत्र में निम्नलिखित विनिर्दिष्ट करते हुए आशयित विक्रय की घोषणा करेगा
(क) विक्रय किए जाने हेतु वांछित संपत्ति का विवरण
(ख) ऐसी संपत्ति का अनुमानित मूल्य आरक्षित मूल्य और सर्किल रेट
(ग) तद्निमित्त संदेय भू राजस्व यदि कोई हो
(घ) विल्लंगम यदि कोई हो
(ड़) बकरियों की धनराशि जिसकी वसूली के लिए संपत्ति का विक्रय किया जाना वांछित हो
(च) आशयित विक्रय का दिनांक समय और स्थान और
(छ) ऐसे अन्य विवरण जिले के कलेक्टर आवश्यक समझे
(2) जहां विक्रय किए जाने हेतु वंचित भूमि का क्षेत्रफल 5.0586 हेक्टेयर हो वहां उपधारा (1) के अधीन एकल उद्घोषणा जारी की जा सकती है किंतु वास्तविक विक्रय 1.26 हेक्टेयर या उससे अधिक के समूह में किया जाएगा
(3) ऐसा कोई विकृत तब तक नहीं किया जाएगा जब तक ऐसे दिनांक जिस पर इस धारा के अधीन उद्घोषणा जारी की जाती है से 21 दिन का समय समाप्त नहीं हो जाता है
(4) उद्घोषणा की एक प्रति व्यतिक्रमी को तामील कराई जाएगी
उद्घोषणा का चिपकाया जाना (Affixation of Proclamation) :- उक्त नई संहिता की धारा 185 के अनुसार, धारा 184 में निर्दिष्ट विक्रय उद्घोषणा के प्रति निम्न लिखित प्रत्येक स्थान पर चिपकाए जाएगी
(क) कलेक्टर का कार्यालय
(ख) तहसील जिसमें संपत्ति स्थित हो, के तहसीलदार का कार्यालय
(ग) ग्रामीण क्षेत्र जिसमें संपत्ति स्थित हो के तहसीलदार का कार्यालय
(घ) व्यतिक्रमी का निवास ग्रह
विक्रय कब और किसके द्वारा किया जाए (Sale when and by whom made) :- उक्त नई संहिता की धारा 186 के अनुसार एक ऐसा प्रत्येक विक्रय कलेक्टर द्वारा यह उसके द्वारा प्राधिकृत सहायक कलेक्टर द्वारा किया जाएगा
(2) कोई विक्रय रविवार या राज्य सरकार के कार्यालय के लिए अधिसूचित अन्य अवकाश दिवस में नहीं किया जाएगा
(3) कलेक्टर के सहायक कलेक्टर किसी पर्याप्त कारण से समय-समय पर विक्रय को स्थगित कर सकते हैं
(4) जहां किसी विक्रय को 21 दिन से अधिक अवधि के लिए स्थगित किया गया हो या जहां क्रय धन के भुगतान में व्यतिक्रम के कारण संपत्ति का पुनः विक्रय किया जाता है तो मूल विक्रय के लिए विहित प्रपत्र में नई उद्घोषणा निर्गत की जाएगी
विक्रय को रोका जाना (Stoppage of the Sale) :- उक्त नई संहिता की धारा 187 के अनुसार यदि व्यतिक्रमी ऐसी संपत्ति जिसका विक्रय किया जाना है के संबंध में विक्रय के लिए नियत दिनांक से पूर्व किसी भी समय प्रक्रिया की लागत सहित बकाए का भुगतान कर देता है तो विक्रय को संचालित करने वाला अधिकारी ऐसे विक्रय को रोक देगा
बोली लगने का निषेध (Prohibition to Bid) :- उक्त नई संहिता की धारा 188 के अनुसार (1) कोई अधिकारी जो ऐसे किसी विक्रय के संबंध में कोई कर्तव्य निष्पादित कर रहा है और ऐसे अधिकारी द्वारा नियोजित या अधीनस्थ कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप स विक्रय की गई संपत्ति अथवा उससे संबंधित किसी हित के लिए गोली नहीं लगाएगा या उसको अर्जित नहीं करेगा या अर्जित करने का प्रयास नहीं करेगा
(2) जहां ऐसी धनराशि तक जिसके लिए विक्रय का आदेश दिया गया हो कोई बोली नहीं लगाई गई है तो कलेक्टर ऐसी धनराशि के अवशेष तक की बोली लगाने के लिए आदेश दे सकता है
क्रेता द्वारा राशि का जमा किया जाना और व्यतिक्रम पर पुन: विक्रय ( Deposit by purchaser and re-sale on default) :- उक्त नई संहिता की धारा 189 के अनुसार (1) क्रेता घोषित किए गए व्यक्ति से उसकी बोली की धनराशि का 50% तुरंत जमा करने की अपेक्षा की जाएगी और ऐसी धनराशि जमा करने में व्यतिक्रम होने पर संपत्ति तत्काल पुन: विक्रय कर दी जाएगी और ऐसा व्यक्ति प्रथम विक्रय में उपगत व्ययों और पुन: विक्रय पर मूल्य में होने वाले किसी कमी का दायी होगा और कलेक्टर द्वारा इसे भू-राजस्व के बकाए के रूप में वसूल किया जा सकेगा
(2) उपधारा (1) के अधीन कोई जमा या तो नकद या डिमांड द्वारा (किसी अधिसूचित अनुसूचित बैंक द्वारा निर्गत) या अंशत: नकद और अंशत: ऐसे ड्राफ्ट द्वारा किया जा सकता है
स्पष्टीकरण :- इस धारा के प्रयोजनों के लिए पद "डिमांड-ड्राफ्ट" में बैंकर्स चेक भी शामिल है
क्रय धन का जमा किया जाना (Deposit of Purchase Money) :- उक्त नई संहिता की धारा 190 के अनुसार क्रय धन की शेष धनराशि क्रेता द्वारा विक्रय के दिनांक से 15 दिन पर या इसके पूर्व कलेक्टर के कार्यालय में या (जिला) कोषागार या उप-कोषागार में जमा की जाएगी और व्यतिक्रम करने पर :-
(क) संपत्ति को पुन: विक्रय कर दिया जाएगा, और
(ख) धारा 189 के अधीन जमा की गई धनराशि राज्य सरकार को समप्रहत (Forfeited) हो जाएगी
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