प्रापक की नियुक्ति कब और कौन कर सकता है

प्रापक (रिसीवर) की नियुक्ति कब और कौन कर सकता है ? (When and who make Appointment of Receiver ?)

प्रापक की नियुक्ति कब और कौन कर सकता है


प्रापक की नियुक्ति :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2016 की धारा 178 के अनुसार (1) जहां किसी व्यतिक्रमी से भू राजस्व की कोई बकाया देय हो वहां कलेक्टर आदेश द्वारा :-

(क) व्यतिक्रम की किसी जंगम या स्थावर संपत्ति ऐसा अवधि के लिए जिसे वे उचित समझे रिसीवर नियुक्त कर सकता है

(ख) किसी व्यक्ति को संपत्ति के कब्जे और उसकी अभिरक्षा से हटा सकता है और उस भूमि को रिसीवर के कब्जे अभिरक्षा या प्रबंध में दे सकता है

(ग) रिसीवर को वाद प्रस्तुत करने और उनका प्रतिवाद करने संपत्ति की वसूली प्रबंध संरक्षण पर आरक्षण और सुधार करने उसका लगान अल्लाह का संग्रह करने ऐसे लगान और लव का उपयोग होने कारण करने और दस्तावेजों का निष्पादन करने की ऐसी शक्तियां प्रदान कर सकता है जो ऐसे व्यतिक्रमी के पास हो या उनमें से ऐसी शक्तियों को प्रदान कर सकता है जिसे कलेक्टर उचित समझे

(2) इस धारा की कोई बात किसी ऐसे व्यक्ति को जिसे हटाने का वर्तमान अधिकार व्यतिक्रमी को न हो, संपत्ति के कब्जे या अभिरक्षा से हटाने के लिए कलेक्टर को प्राधिकृत नहीं करेंगी

(3) कलेक्टर समय-समय पर रिसीवर की नियुक्ति की कालावधी बढ़ा सकता है

(4) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक कि व्यतिक्रमी को कारण बताने का नोटिस ना दे दिया जाए और ऐसे अभ्यावेदन पर जो ऐसे नोटिस के प्रत्युत्तर में कलेक्टर द्वारा प्राप्त हो विचार न कर लिया जाए

           परंतु उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन कोई अंतरिम आदेश ऐसी सूचना के जारी किए जाने के पहले या बाद में किसी भी समय किया जा सकता है

               परंतु अग्रेतर यह कि जहां जांच सूचना जारी किए जाने के पूर्व कोई अंतरिम आदेश किया जाता है तो अंतरिम आदेश के दिनांक से 2 सप्ताह के भीतर कोई सूचना जारी न किए जाने पर ऐसा आदेश निरस्त हो जाएगा

(5) सिविल प्रक्रिया संहिता 1960 की प्रथम अनुसूची में दिए गए आदेश 40 के नियम 2 से 4 तक के उपबंधों यथा आवश्यक परिवर्तनों सहित इस धारा के अधीन नियुक्त रिसीवर के संबंध में लागू होंगे

(6) प्राप्त कलेक्टर के नियंत्रण के अधीन रहते हुए कार्य करेगा और ऐसी सूचना विवरण या विवरण पत्र प्रस्तुत करेगा जिसे कलेक्टर उचित समझें

(7) कलेक्टर लिखित आदेश से और कोई कारण बताए बिना किसी रिसीवर को ऐसे रिसीवर का कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व हटा सकता है और उसके स्थान पर कोई अन्य रिसीवर नियुक्त कर सकता है यदि उसका यह समाधान हो जाए की अद्क्षता घोर उपेक्षा जानबूझकर व्यतिक्रम अवज्ञा अवचार गंभीर लोप या किसी संपत्ति के दूर विनियोग के आधार पर किसी रिसीवर का बना रहना वांछनीय या समीचीन ना होगा इस धारा के अधीन रिसीवर के पद से हटाया गया व्यक्ति हटाए जाने के कारण किसी क्षतिपूर्ति या प्रतिकार का हकदार नहीं होगा

(8) कलेक्टर को रिसीवर को सुनवाई का अवसर देने के पश्चात कि अवधारणा करने की रिसीवर के जानबूझकर व्यतिक्रम करने और अवचार या उसकी कोई घोर उपेक्षा से या किसी और दुर्विनियोग के कारण क्या और कितनी हानि यदि कोई हो हुई है और रिसीवर से हानि की धनराशि भू राजस्व की बकाया की तरह वसूल करने की शक्ति होगी

(9) संपत्ति का लगान या उससे प्राप्त कोई अन्य आए प्रबंध वेयर को जिसमें रिसीवर का पारिश्रमिक भी सम्मिलित है चुकता करने के पश्चात बकाया को चुकता करने के लिए समायोजित किया जाएगा और शेष धन यदि कोई हो व्यतिक्रमी को दे दिया जाएगा

(10) जैसे ही उपधारा 9 के अधीन या अन्य किसी प्रकार से बकाया चुकता हो जाए कलेक्टर व्यतिक्रम ही अपराधी को संपत्ति वापस कर देगा

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