असामी से आप क्या समझते हैं
असामी से आप क्या समझते हैं?
असामी का अर्थ(Meaning of Asami):- उत्तर प्रदेश अधिनियम संख्यांक 4 सन 2016 द्वारा प्रतिस्थापित जो दिनांक 11-02-2016 से प्रभावी है की धारा 78 के अनुसार निम्नलिखित वर्गों में से किसी एक वर्ग का प्रत्येक व्यक्ति आसामी कहलाएगा और उसको वे सभी अधिकार प्राप्त होंगे और उस पर वे सभी दायित्व आरोपित किए जाएंगे जो इस संहिता द्वारा या संहिता के अंतर्गत ऐसे आसामी को प्रदत्त या उस पर आरोपित किए गए हो, अर्थात:-
(क) इस संहिता की धारा 76 की उपधारा एक के खंड (घघ) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए प्रत्येक व्यक्ति जो इस संहिता के आरंभ के दिनांक के ठीक पूर्व आसामी था|
(ख) प्रत्येक व्यक्ति जिसे भूमि प्रबंधक समिति द्वारा उक्त तारीख को या उसके बाद इस संहिता के प्रावधानों के अधीन के या अनुसार किसी भूमि पर आसामी स्वीकार किया गया हो|
(ग) प्रत्येक व्यक्ति को जो इस संहिता के प्रावधानों के अधीन या अनुसार किसी भूमि के भूमिधर द्वारा उक्त तारीख को या उसके बाद पट्टेदार के रूप में स्वीकार किया गया हो|
(घ) प्रत्येक व्यक्ति जो इस संहिता के या इस समय लागू किसी अन्य विधि के प्रावधानों के अंतर्गत या अनुसार किसी अन्य तरीके से आसामी का अधिकार प्राप्त कर लें|
वास्तव में आसामी जोतदार की एक तुच्छ किस्म है| आसामी के अधिकार उत्तर प्रदेश काश्तकारी अधिनियम 1939 के "गैर दखीलकार काश्तकार" के समान है आसामी के अधिकार वंशानुगामी तो हैं परंतु ये स्थाई नहीं है जब कोई एक्शन भूमिधर अधिनियम के अनुसार अपनी भूमि किसी अन्य व्यक्ति को लगान पर देता है तो लगान पर लेने वाला ऐसा व्यक्ति आसामी कहलायेगा इस की हैसियत शिकमी काश्तकार के समान होती है पुराने अधिनियम की धारा 132 कुछ ऐसी भूमियों का वर्णन करती है जिनमें भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं किए जा सकते| ऐसी भूमि में यदि किसी व्यक्ति का दाखिला किया गया है तो वह आसामी कहलाएगा नियम 176-क के अंतर्गत ग्राम सभा का समय केवल सीमित अवधि (अधिकतम 5 साल के लिए) होता है| तत्पश्चात गांव सभा आसामी को पट्टे की भूमि से कभी भी बेदखल कर सकती है इस प्रकार आसामी या तो ग्राम सभा का स्वामी होगा या किसी भूमिधर का आसामी होगा
पुराने अधिनियम की धारा 133 केवल निम्न चार प्रकार के आसामी का वर्णन करती है:-
1. ऐसे व्यक्ति जो जमीदारी समाप्ति के फलस्वरुप आसामी बन गए
2. ऐसा व्यक्ति जिसे किसी भूमिधर ने अपनी जोत की भूमि को इस अधिनियम के प्रावधान के अनुसार पट्टे पर उठा दी है|
3. ऐसे व्यक्ति जिन्हें भूमि प्रबंधक समिति ने, या ऐसे व्यक्ति ने जिसे ऐसा करने का अधिकार हो, धारा 132 में वर्णित भूमि पट्टे पर उठा दी है उदाहरण के लिए धारा 132 के अनुसार, रेलवे की सीमाओं के अंतर्गत स्थित भूमि में भूमिधरी अधिकार उत्पन्न नहीं होते यदि रेलवे ने किसी व्यक्ति को भूमि लगान पर उठा दी है, तो ऐसा व्यक्ति आसामी होगा|
4. ऐसा व्यक्ति जो इस अधिनियम में या अन्य किसी विधि के अंतर्गत अन्य तरीके से आसामी का अधिकार प्राप्त कर ले
इस तरीके से आसामी बनाने की धाराएं 186 187-क और 210 (2) में वर्णित है| यदि कोई नाबालिक पागल या जड़ भूमिधर आदि कार्यों के लिए नहीं करता है तो भूमि प्रबंधक समिति इस भूमि को किसी व्यक्ति को लगान पर उठा सकती है और ऐसा पट्टेदार आसामी कहलाएगा|
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