भूमिधर द्वारा परित्याग

भूमिधर द्वारा परित्याग का अर्थ तथा इसका परिणाम (Meaning of Abandonment by Bhumidhar and it's consequentes)

भूमिधर द्वारा परित्याग (Abandonment by Bhumidhar):- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 122 के अनुसार, (1) यदि कोई भूमिधर लगातार तीन कृषि वर्ष की अवधि तक भू राजस्व का भुगतान ना करें और उस भूमि का कृषि के लिए प्रयोग ना करें और वह उस ग्राम को छोड़ दें जिसमें वह साधारणतया निवास करता है जिसका पता ना हो तो कलेक्टर ऐसी जांच करने के पश्चात जिसे वह आवश्यक समझे ऐसे भूमिधर द्वारा धारित भूमि का कब्जा ले सकता है|

(2) जहां कलेक्टर ने उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि का कब्जा ले लिया हो वहां वह उसे भूमिधर की ओर से एक बार में एक कृषि वर्ष की अवधि के लिए वे विहित रीति से पट्टे पर दे सकता है|

(3) यदि भूमिधर या कोई अन्य व्यक्ति जो विधि पूर्वक भूमि का हकदार हो उस दिनांक को जब कलेक्टर ने उसका कब्जा लिया हो, अनुगामी कृषि वर्ष के प्रारंभ होने से 3 वर्ष की अवधि के भीतर उसका दावा करें तो वह उसे देयो का यदि कोई हो, भुगतान करने पर और ऐसे निबंधन और शर्तें पर जिन्हें कलेक्टर उचित समझें, वापस कर दी जाएगी|

(4) जहां उपधारा (3) के अधीन कोई दावा  किया जाए या यदि कोई दावा किया जाए किंतु उसे अस्वीकृत कर दिया जाए वहां कलेक्टर जोत को परित्यक्त घोषित करते हुए आदेश देगा|

(5) उपधारा (4) के अधीन कलेक्टर का प्रत्येक आदेश विहित रीति से प्रकाशित किया जाएगा, और धारा 144 के अधीन किसी वाद के परिणाम के अधीन रहते हुए, अंतिम होगा|

(6) इस धारा की कोई बात ऐसे भूमिधर, द्वारा धारित किसी जोत पर लागू नहीं होगी जिसके पक्ष में धारा 80 के अधीन घोषणा की गई हो जहां ऐसी घोषणा निरंतर प्रवृत्त हो|

परित्याग का परिणाम ( consequences of Abandonment) :- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 123 के अनुसार यहां धारा 122 के अधीन कोई जोत परित्यक्त हो वहां निम्नलिखित परिणाम होंगे अर्थात:-

(क) जोत समस्त भारत से मुक्त राज्य सरकार में पूर्णतया निहित हो जाएगी|

(ख) संबद्ध भूमिधर का ऐसी जोत में कोई अधिकार हक या हित नहीं रह जाएगा|

(ग) संबद्ध भूमिधर ऐसे कृषि वर्ष के लिए जिसके दौरान उक्त धारा की उपधारा (4) में निर्दिष्ट आदेश दिया गया हो ऐसी जोत के संबंध में दे भू-राजस्व का देनदार बना रहेगा|


कोई टिप्पणी नहीं

Blogger द्वारा संचालित.